Sunday, 31 July 2016

UBUNDTU एक सुंदर कथा

*उबुन्टु* ( *UBUNTU* ) - एक सुंदर कथा :
कुछ आफ्रिकन आदीवासी बच्चों को एक मनोविज्ञानी ने एक खेल खेलने को कहा।
उसने एक टोकरी में मिठाइयाँ और कैंडीज एक वृक्ष के पास रख दिए।
बच्चों को वृक्ष से 100 मीटर दूर खड़े कर दिया।
फिर उसने कहा कि, जो बच्चा सबसे पहले पहुँचेगा उसे टोकरी के सारे स्वीट्स मिलेंगे।
जैसे ही उसने, _रेड़ी स्टेडी गो_ कहा.....
तो जानते हैं उन छोटे बच्चों ने क्या किया ?
सभी ने एक दुसरे का हाँथ पकड़ा और एक साथ वृक्ष की ओर दौड़ गए.
पास जाकर उन्होंने सारी मिठाइयाँ और कैंडीज आपस में बराबर बाँट लिए और मजे ले लेकर खाने लगे।
जब मनोविज्ञानी ने पूछा कि, उन लोगों ने ऐंसा क्यों किया ?
तो उन्होंने कहा--- *"उबुन्टु ( Ubuntu ) "*
जिसका मतलब है,
" _कोई एक व्यक्ति कैसे खुश रह सकता है जब, बाकी दूसरे सभी दुखी हों_ ? "
*उबुन्टु* ( *Ubuntu* ) का उनकी भाषा में मतलब है,
*" मैं हूँ क्योंकि, हम हैं ! "*
सभी पीढ़ियों के लिए एक सुन्दर सन्देश,
आइए इस के साथ सब ओर जहाँ भी जाएँ, खुशियाँ बिखेरें,
आइए _*उबुन्टु*_ ( _*Ubuntu*_ ) वाली जिंदगी जिएँ.....
*" मैं हूँ,* _क्योंकि_, *हम हैं....!!!*h
*I AM,* _Because_, *WE ARE.....!!!"*
*साथ सदैव बना रहै...!*

Saturday, 16 July 2016

वास्तविकता

.
एक जौहरी के निधन के बाद उसका 
परिवार संकट में पड़ गया।
,
खाने के भी लाले पड़ गए।
,
एक दिन उसकी पत्नी ने अपने बेटे 
को नीलम का एक हार 
देकर कहा- 'बेटा, इसे अपने चाचा की 
दुकान पर ले जाओ।
,
कहना इसे बेचकर कुछ रुपये दे दें।
,
बेटा वह हार लेकर चाचा जी के पास गया।
,
चाचा ने हार को अच्छी तरह से देख
परखकर कहा- बेटा, 
मां से कहना कि अभी बाजार
बहुत मंदा है।
,
थोड़ा रुककर बेचना, 
अच्छे दाम मिलेंगे।
,
उसे थोड़े से रुपये देकर कहा कि 
तुम कल से दुकान पर आकर बैठना।
,
अगले दिन से वह लड़का रोज दुकान 
पर जाने लगा और वहां हीरों 
रत्नो की परख का काम सीखने लगा।
,
एक दिन वह बड़ा पारखी बन गया।
लोग दूर-दूर से अपने हीरे की परख कराने 
आने लगे।
,
एक दिन उसके चाचा ने कहा, बेटा अपनी
मां से वह हार लेकर आना और कहना 
कि अब बाजार बहुत तेज है,
,
उसके अच्छे दाम मिल जाएंगे।
,
मां से हार लेकर उसने परखा तो 
पाया कि वह तो नकली है।
,
वह उसे घर पर ही छोड़ कर 
दुकान लौट आया।
,
चाचा ने पूछा, हार नहीं लाए?
,
उसने कहा, वह तो नकली था।
,
तब चाचा ने कहा- जब तुम पहली बार
हार लेकर आये थे, तब मैं उसे 
नकली बता देता तो तुम सोचते कि 
आज हम पर बुरा वक्त आया तो चाचा 
हमारी चीज को भी नकली 
बताने लगे।
,
आज जब तुम्हें खुद ज्ञान हो गया तो
पता चल गया कि हार सचमुच नकली है।
,
सच यह है कि ज्ञान के बिना इस संसार में 
हम जो भी सोचते, देखते और जानते हैं, 
सब गलत है।
,
और ऐसे ही गलतफहमी का शिकार 
होकर रिश्ते बिगडते है।





ज़रा सी रंजिश पर ,ना छोड़
किसी अपने का दामन.
,
ज़िंदगी बीत जाती है
अपनो को अपना बनाने में..!
,