Saturday, 13 June 2020

कर्म का सिद्धांत

अचानक अस्पताल में एक एक्सीडेंट का केस आया । अस्पताल के मालिक डॉक्टर ने तत्काल खुद जाकर आईसीयू में केस की जांच की।

जाँच के बाद अपने स्टाफ को कहा कि इस व्यक्ति को किसी प्रकार की कमी या तकलीफ ना हो।उसके इलाज की सारी व्यवस्था की। रुपए लेने से भी या मांगने से भी मना किया।

15 दिन तक मरीज अस्पताल में रहा। जब बिल्कुल ठीक हो गया  और उसको डिस्चार्ज करने का दिन है, तो उस मरीज का बिल अस्पताल के मालिक और डॉक्टर की टेबल पर आया। डॉक्टर ने अपने अकाउंट  मैनेजर को बुला करके कहा  इस व्यक्ति से एक पैसा भी नहीं लेना है।

अकाउंट मैनेजर ने कहा कि डॉक्टर साहब तीन लाख का बिल है। नहीं लेंगे तो कैसे काम चलेगा। डॉक्टर ने कहा कि दस लाख का भी क्यों न हो। एक पैसा भी नहीं लेना है।  ऐसा करो तुम उस मरीज को लेकर मेरे चेंबर में आओ, और तुम भी साथ में जरूर आना।

मरीज व्हीलचेयर पर चेंबर में लाया गया। साथ में मैनेजर भी था।

डॉक्टर ने मरीज से पूछा  प्रवीण भाई ! मुझे पहचानते हो !

मरीज ने कहा लगता तो है कि मैंने आपको कहीं देखा है।  
डॉक्टर ने याद दिलाया। एक परिवार पिकनिक पर गया था। लौटते समय कार बंद हो गयी और अचानक कार में से धुआं निकलने लगा।

कार एक तरफ खड़ी कर थोड़ी देर हम लोगों ने चालू करने की कोशिश की, परंतु कार चालू नहीं हुई। दिन अस्त होने वाला था। अंधेरा थोड़ा-थोड़ा घिरने लगा था। चारों और जंगल और सुनसान था। परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर चिंता और भय की लकीरें दिखने लगी। पति, पत्नी, युवा पुत्री और छोटा बालक। सब भगवान से प्रार्थना करने लगे कि कोई मदद मिल जाए।

थोड़ी ही देर में चमत्कार हुआ। मैले कपड़े में एक युवा  बाइक के ऊपर उधर आता हुआ दिखा। हम सब ने दया की नजर से हाथ ऊंचा करके उसको रुकने का इशारा किया।  यह तुम ही थे ना प्रवीण ! तुमने गाड़ी खड़ी रखकर हमारी परेशानी का कारण पूछा। फिर तुम कार के पास गए।कार का बोनट खोला और चेक किया। हमारे परिवार को और मुझको ऐसा लगा कि जैसे भगवान् ने हमारी मदद करने के लिए तुमको भेजा है। क्योंकि बहुत सुनसान था ।अंधेरा भी होने लगा था। और जंगल घना था। वहां पर रात बिताना बहुत मुश्किल था। और खतरा भी बहुत था। तुमने हमारी कार चालू कर दी। हम सबके चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई।

मैंने जेब से बटुआ निकाला और तुमसे कहा  भाई सबसे पहले तो तुम्हारा बहुत आभार। रुपए पास होते हुए भी ऐसी मुश्किल में मदद नहीं मिलती। तुमने ऐसे कठिन समय में हमारी मदद की, इस मदद की कोई कीमत नहीं है।अमूल्य है। परंतु फिर भी मैं पूछना चाहता हूँ बताओ कितने पैसे दूँ।

उस समय तुमने मेरे से हाथ जोड़कर कहा और जो तुमने शब्द कहे वह शब्द मेरे जीवन की प्रेरणा बन गये। तुमने कहा मेरा नियम और सिद्धांत है कि मुश्किल में पड़े व्यक्ति की मदद के बदले कभी पैसे नहीं लेता। मैं मुश्किल में पड़े हुए लोगों से कभी भी मजदूरी नहीं लेता। मेरी इस मजदूरी का हिसाब भगवान् रखते हैं।  एक गरीब और सामान्य आय का व्यक्ति अगर इस प्रकार के उच्च विचार रखे, और उनका संकल्प पूर्वक पालन करे, तो मैं क्यों नहीं कर सकता। यह बात मेरे मन में आई। मेरे मन में धीरे से मेरी आत्मा ने मुझसे पूछा।
 
तुमने यह भी कहा कि यहाँ से 10 किलोमीटर आगे मेरा गैराज  है। मैं गाड़ी के पीछे पीछे चल रहा हूँ। गैराज़ पर चलकर के पूरी तरह से गाड़ी चेक कर लूँगा। और फिर आप यात्रा करें।

दोस्त यह बात, यह घटना पूरे 3 साल होने को आ गए । मैं न तो तुमको भूला ना तुम्हारे शब्दों को।

और मैंने भी अपने जीवन में वही संकल्प ले लिया 3 साल हो गए। मुझे कोई कमी नहीं पड़ी। मुझे मेरी अपेक्षा से भी अधिक मिला। क्योंकि मैं भी तुम्हारे सिद्धांत के अनुसार चलने लगा। और एक बात मैंने सीखी कि  बड़ा दिल तो गरीब और सामान्य लोगों का ही होता है।

उस समय मेरी तकलीफ देखकर तुम चाहे जितने पैसे मांग सकते थे। परंतु तुमने पैसे की बात ही नहीं की।  पहले कार चालू की और फिर भी कुछ भी नहीं लिया। यह अस्पताल मेरा है। तुम यहां मेरे मेहमान बनकर आए। मैं तुम्हारे पास से कुछ भी नहीं ले सकता।

प्रवीण ने कहा कि साहब आपका जो खर्चा है वह तो ले लो। डॉक्टर ने कहा कि मैंने अपना परिचय का कार्ड तुमको उस वक्त नहीं दिया क्योंकि तुम्हारे शब्दों ने मेरी अंतरात्मा को जगा दिया।

मैं भगवान् से प्रार्थना करता था कि जिसने मुझे इतनी  बड़ी प्रेरणा दी, उस व्यक्ति का कर्ज चुकाने का मौका कभी मुझे मिले। और आज ऐसा अवसर आया कि मैं तुम्हारा कर्ज़ चुका पाया। अब मैं भी अस्पताल में आए हुए ऐसे संकट में पड़े लोगों से कुछ भी नहीं लेता हूँ।
यह ऊपर वाले ने तुम्हारी मजदूरी का हिसाब रखा और वह मजदूरी का हिसाब आज उसने चुका दिया। मेरी मजदूरी का हिसाब भी ऊपर वाला रखेगा और कभी जब मुझे जरूरत होगी, जरूर चुका देगा।

अकाउंट मैनेजर से डॉक्टर ने कहा कि  ज्ञान पाने के लिए जरूरी नहीं कि कोई गुरु या महान पुरुष ही हो। एक सामान्य व्यक्ति भी हमारे जीवन के लिए बड़ी शिक्षा और प्रेरणा दे सकता है।

प्रवीण से डॉक्टर ने कहा तुम आराम से घर जाओ , और कभी भी कोई तकलीफ हो तो बिना संकोच के मेरे पास आ सकते हो, और आना। यह याद रखो कि समय बदलता रहता है।

प्रवीण ने मेरे चेंबर में रखी भगवान् की तस्वीर के सामने हाथ जोड़कर कहा कि हे प्रभु आपने आज मेरे कर्म का पूरा हिसाब ब्याज समेत चुका दिया।
सीख : समय बदलता रहता है। जब भगवान् को लेना होता है तो वह कुछ भी नहीं छोड़ते, और जब देना होता है तो छप्पर फाड़ कर देते हैं।  और एक बार भगवान् चाहे माफ कर दे, परंतु कर्म माफ नहीं करते।
             

Wednesday, 10 June 2020

पालनहार


हर समय कण्ठी माला लेकर बैठे रहते हो । कभी कुछ दो पैसे का इंतजाम करो , लड़की के लिए लड़का नहीं देखना है कहीं ? आज फिर निर्मला ने रोज की तरह सुबह से ही बड़बड़ाना शुरु कर दिया।

अरे भाग्यवान ! ईश्वर पर विश्वास रखो , समय पर सब हो जाएगा । चौबे जी ने अपना गमछा संभालते हुए कहा , इन चरणों में जो भी आये , उसका जन्म सफल हो जाये।

हाँ , हाँ , ईश्वर तो जैसे घर बैठे ही लड़का भेज देंगे ! !! भगवान के पास तो कोई काम है नहीं , सिर्फ आपका ध्यान रखने के अलावा ।

अरे क्यों पूरा दिन चकचक करती रहती हो ? वैसे चौबेजी कभी गुस्सा नहीं होते। वो तो बीमारी के चलते नौकरी छोड दी थी । अब बस पूरा दिन बस गोपाल जी की सेवा करते और उन्ही के बारे में ही सोचते हैं ।

निर्मला बोली जयपुर वाली मौसी बता रही थी , उनके रिश्तेदारी में एक लड़का है , पर देखने तो जब आओगे , जब जेब में दो चार हजार रुपए होंगे । जो दस बीस रुपए बचते हैं , उन्हें भी अपने दोस्तों को उधार दिए बैठे हो , आज तक लौटाए हैं किसी दोस्त ने।

पर आज तक कभी किसी चीज की कोई कमी हुई है । नहीं ना ! आगे भी नहीं होगी , ईश्वर की कृपा से । भजन ही करना था तो शादी क्यों की ? अब क्या वो बैठे-बिठाए तुम्हारी लड़की की शादी भी कर जाएंगे ! !!

हाँ , रहने दो बस ! यह लो थैला पकड़ो और जाओ बाजार से रसोई के लिए सामान ले आओ और हां , जिस लडके के बारे में मैंने बात की है ,उसके बारे में जरा सोचना परसों जाना है तुम्हें । अब थोड़े बहुत पैसों  के लिए हम एफ डी तो तुडवाएंगे नहीं , सो जो यार दोस्तों को उधार दे रखे हैं उनसे जरा मांग लो।

थैला लेकर चौबेजी निकले , सब्जी लेने से पहले जरा अपने एक दोस्त से अपने पैसों की बात कर ली जाए । वो जिस दुकान में काम करता है , वह भी पास ही है ।

मोहनलाल ने अपने मित्र चौबेजी को देखा तो गले लगा लिया । अरे ! चौबेजी कैसे आना हुआ ? कुछ नहीं भैया ! कुछ समस्या आन पड़ी है । पैसो की सख्त जरुरत है ? अपने ही पैसे चौबे जी ऐसे मांग रहे हैं , जैसे उधार मांग रहे हों ! अच्छा , देखता हूँ , मालिक तो बीमार हैं , चार दिन पहले ही दिल का दौरा पड़ा था । पर चलो एक दो दिन में आएंगे तो मांग करके तुम्हें दे दूंगा।

और बताओ बिटिया ठीक है ?सर्वगुण संपन्न है जी हमारी लाली । कैबिन से बाहर  निकले ही थे , एक जगह नज़र टिक गई । इतनी सुंदर मूर्ति गोपाल जी की ! चौबे जी अपलक देख रहे थे जैसे अभी बात करने लगेगी ! तभी मोहनलाल ने ध्यान भंग करते हुए कहा , मालिक ने आर्डर पर बनवाई है। बाहर से बनकर आई है । ऐसी दो बनवाई हैं ।

रास्ते भर मूर्ति की छवि उनकी नजरों से ओझल नहीं हो रही थी । काश ! वो मूर्ति उनके पास होती ! !! तो दिनभर निहारते रहते , क्या क्या सेवा करते , सोचते सोचते , घर कब आया पता ही नहीं चला।

लेकिन घर के सामने इतनी भीड़ क्यों है ? यह गाड़ी किसकी है ? गाड़ी तो काफी महंगी लग रही है ? अपने घर के दरवाजे में घुसने ही वाले थे कि थैला हाथ से छीनकर निर्मला ने मुस्कुराकर उनका  स्वागत किया।

कौन आया है ? अंदर सूट बूट में एक आदमी बैठा है । चौबेजी को  देखते ही वो हाथ जोड़कर खड़ा हो गया । चौबे जी ने राधे राधे कहा । बैठिए , पर क्षमा कीजिए मैंने आपको पहचाना नहीं।

अरे ! आप कैसे पहचानेंगे ? हम पहली बार मिल रहे हैं । उसने बड़ी शालीनता के साथ जवाब दिया । जी  कहिए , मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ ? दरअसल मैं आपसे कुछ मांगने आया हूँ । चौबे जी सोच में पडे थे इतने बड़े आदमी को मुझसे क्या चाहिए ?

आज से चार दिन पहले मेरे साथ एक दुर्घटना हुई । अचानक मुझे रास्ते में हार्टअटैक आ गया । आसपास  कोई नहीं था मदद के लिए । ना मैं कुछ बोल पा रहा था । तभी एक लड़की ने आकर अपनी स्कूटी रोकी।

एक आदमी की मदद से उसने मुझे अपनी स्कूटी पर बिठाया , और मुझे हॉस्पिटल लेकर गई । अगर थोड़ी सी भी देर हो जाती शायद मेरा अन्त निश्चित था। और वो लड़की कोई और नहीं , आपकी बेटी थी ! !!

उस आदमी ने हाथ जोड़ते हुए कहा , अगर आप लायक समझें , तो मैं अपने बेटे के लिए आपकी बेटी का हाथ मांगता हूं । जो अनजान की मदद कर सकती है , वो अपने घर परिवार का कितना ध्यान रखेगी।"

चौबेजी एक दम जड़ हो गए ! वह विश्वास नहीं कर पा रहे थे ! !! हे ईश्वर ! क्या यह सब सच में ये हो रहा है कि मुझे किसी के दरवाजे पर ना जाना पड़े । इस स्थिति से बाहर निकले भी नहीं थे कि तभी उन्होंने अपने पास रखे हुए बैग में से एक बाक्स निकाला , और चौबे जी को देते हुए कहा कि शगुन का एक छोटा सा उपहार है। मना मत करना.. ।

चौबे जी ने बॉक्स खोलते हुए देखा , उसमें वही गोपाल जी की मूर्ति थी , जिसे अभी शोरूम में देखकर आए थे । जो आंखो के सामने से ओझल नहीं हो रही थी । जिसे देखते ही मन में ये ख्याल आया था कि काश मेरे मंदिर में होती ! !!

चौबे जी सोच रहे थे आज ऊपरवाले ने प्रमाणित  कर दिया कि मुझे उसका जितना ख्याल है , उससे कहीं ज्यादा उसे मेरा ख्याल है ।
     
राधे राधे 🙏🙏