Saturday, 29 July 2023

छोटी सी गिलहरी जिसने की थी भगवान राम की मदद

 भगवान राम और उनकी वानर सेना रावण से युद्ध की तैयारी कर रही थी।

राम ने अपनी सेना को समुद्र पर पुल बनाने के लिए कहा। एक पत्थर के पुल पर तुरंत काम शुरू हुआ। वानर पहाड़ों से चट्टानें और भारी पत्थर उखाड़कर समुद्र में ले जाते थे। उन्होंने पत्थरो को काटना और पुल बनाना शुरू किया। ये बहुत कठिन काम थाऔर इसमें काफी समय लग रहा था. हजारों बंदर रात-दिन काम करते थे।राम को ख़ुशी हुई. "वे कितनी मेहनत करते हैं! मेरे प्रति उनका प्यार उन्हें इस तरह काम करने के लिए प्रेरित करता है,'' राम ने सोचा।

एक दिन, राम ने एक छोटी भूरी गिलहरी देखी। वह मुँह में छोटे-छोटे कंकड़ लेकर समुद्र के किनारे ऊपर-नीचे जा रही थी। छोटी गिलहरी एक बार में केवल छोटे-छोटे कंकड़ ही अपने छोटे मुँह में ले जा सकती थी। वह समुद्र के किनारे से कंकड़-पत्थर ले आती और उन्हें समुद्र में गिरा देती।

एक बड़ा बंदर अपनी पीठ पर एक बड़ा भारी पत्थर ले जा रहा था और गिलहरी उसके रास्ते में आ गई। बंदर वापस कूद गया. “अरे तुम छोटी सी जानवर यहाँ क्या कर रही हो ,” बंदर बड़ी जोर से गुर्राया , “तुम मेरे रास्ते में हो, मैं पीछे हट गया और तुम अब जीवित हो। लेकिन मैं लगभग गिर गया। और तुम यहां क्या कर रही हो ?"

छोटी गिलहरी ने बड़े बंदर की ओर देखा। "मुझे खेद है कि आप लगभग गिर गए, भाई बंदर," उसने अपनी धीमी आवाज़ में कहा, "लेकिन कृपया हमेशा ध्यान दें कि आप कहाँ जा रहे हैं, मैं राम को पुल बनाने में मदद कर रहा हूं। और मैं उसके लिए कड़ी मेहनत करना चाहती हूँ।

"क्या?" बंदर चिल्लाया और जोर से हंसा।

 "आप लोगों ने सुना!" उसने दूसरे बंदरों से कहा।

 “गिलहरी अपने कंकड़ से एक पुल बना रही है। मेरे प्यारे दोस्तों ! मैंने इससे मज़ेदार कहानी कभी नहीं सुनी।'' बाकी बंदर भी हँसे।

गिलहरी को यह बिल्कुल भी मज़ाकिया नहीं लगा। उन्होंने कहा, “देखो, मैं पहाड़ या चट्टानें नहीं उठा सकती भगवान ने मुझे बस थोड़ी सी ताकत दी. मैं केवल कंकड़-पत्थर ही ढो सकती हूँ। मेरा हृदय राम के लिए धडकता है और मैं उनके लिए वह सब कुछ करूँगी जो मैं कर सकती हूँ।"

बंदरों ने कहा, “मूर्ख मत बनो। क्या तुमको लगता है कि तुम राम की मदद कर सकती हो ? क्या तुमको लगता है कि हम कंकड़ों से पुल बना सकते हैं? सहायता के लिए हमारे पास एक बड़ी सेना है। घर जाओ और हमारे रास्ते में मत आओ।”

"लेकिन मैं भी मदद करना चाहती हूँ," गिलहरी ने कहा और नहीं गई।

वह कंकड़-पत्थरों को फिर से किनारे से समुद्र तक ले गया। बंदर क्रोधित हो गए और उनमें से एक ने गिलहरी को पूंछ से उठाकर दूर फेंक दिया।

गिलहरी राम का नाम पुकारती हुई उनके हाथ में गिरी।

तब राम ने गिलहरी को अपने पास बिठा लिया।

उन्होंने बंदरों से कहा, “कमज़ोरों और छोटे लोगों का मज़ाक मत उड़ाओ। आपकी ताकत या आप क्या करते हैं यह महत्वपूर्ण नहीं है। क्या मायने रखता है आपका प्यार. इस छोटी सी गिलहरी के दिल में प्यार है।”

“हे वानरों, आप बहादुर और मजबूत हैं, और इन सभी विशाल पत्थरों और पत्थरों को दूर से लाकर समुद्र में गिराने का अद्भुत काम कर रहे हैं।

लेकिन क्या आपने देखा कि यह छोटी सी गिलहरी और कुछ अन्य छोटे जीव-जंतुओं द्वारा लाए गए छोटे-छोटे कंकड़-पत्थर हैं जो विशाल पत्थरों के बीच बची हुई छोटी-छोटी जगहों को भर रहे हैं?

इसके अलावा, क्या आपको यह एहसास नहीं है कि इस गिलहरी द्वारा लाए गए रेत के छोटे-छोटे कण ही ​​पूरी संरचना को बांधते हैं और इसे मजबूत बनाते हैं? फिर भी आप इस छोटे से जीव को डांटते हैं और गुस्से में उसे दूर भगा देते हैं!

यह सुनकर वानर लज्जित हो गये और अपना सिर झुका लिया।

राम ने आगे कहा, “हमेशा याद रखें, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, हर काम उतना ही महत्वपूर्ण होता है। कोई भी प्रोजेक्ट कभी भी अकेले मुख्य लोगों द्वारा पूरा नहीं किया जा सकता। उन्हें सभी के समर्थन की ज़रूरत है, और प्रयास चाहे कितना भी छोटा क्यों न हो, उसकी हमेशा सराहना की जानी चाहिए!”

राम फिर गिलहरी की ओर मुड़े और धीरे से बोले, “मेरी प्यारी गिलहरी, मेरी सेना द्वारा तुम्हें पहुंचाई गई चोट के लिए मुझे खेद है, और तुमने मेरी जो मदद की है उसके लिए धन्यवाद। कृपया जाओ और ख़ुशी से अपना काम जारी रखो।” यह कहते हुए, उसने धीरे से अपनी उंगलियों से गिलहरी की पीठ को सहलाया, और जहां भगवान की उंगलियों ने उसे छुआ था, वहां तीन रेखाएं दिखाई दीं।

ये भगवान राम की उंगलियों के निशान थे.

कहानी से शिक्षा 

कोई भी कार्य और श्री राम की सेवा, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो, महत्वहीन नहीं है! प्रत्येक कार्य को प्रभु की सेवा के रूप में देखना चाहिए और उनका आशीर्वाद सदैव हमारे साथ रहता है। हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि भगवान राम के लिए प्रेम और समर्पण मायने रखता है, न कि बड़ी सेवाएँ और दिखावा जो हम अपनी प्रतिष्ठा के लिए करते हैं।

Wednesday, 5 April 2023

वैदिक घड़ी ⏱️



◆ 12:00 बजने के स्थान पर आदित्या: लिखा हुआ है, जिसका अर्थ यह है कि सूर्य 12 प्रकार के होते हैं :

अंशुमान,अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, विवस्वान और विष्णु।

◆ 1:00 बजने के स्थान पर ब्रह्म लिखा हुआ है, इसका अर्थ यह है कि ब्रह्म एक ही प्रकार का होता है :

एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति।

◆ 2:00 बजने की स्थान पर अश्विनौ लिखा हुआ है जिसका तात्पर्य यह है कि अश्विनी कुमार दो हैं।

◆ 3:00 बजने के स्थान पर त्रिगुणा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य यह है कि गुण तीन प्रकार के हैं :

सतोगुण, रजोगुण और तमोगुण।

◆ 4:00 बजने के स्थान पर चतुर्वेदा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य यह है कि वेद चार प्रकार के होते हैं :

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद।

◆ 5:00 बजने के स्थान पर पंचप्राणा: लिखा हुआ है, जिसका तात्पर्य है कि प्राण पांच प्रकार के होते हैं : 

अपान, समान, प्राण, उदान और व्यान।

◆ 6:00 बजने के स्थान पर षड्र्सा: लिखा हुआ है, इसका तात्पर्य है कि रस 6 प्रकार के होते हैं :

मधुर, अमल, लवण, कटु, तिक्त और कसाय।

◆ 7:00 बजे के स्थान पर सप्तर्षय: लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सप्त ऋषि 7 हुए हैं :

कश्यप, अत्रि, भारद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ।

◆ 8:00 बजने के स्थान पर अष्ट सिद्धिय: लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि सिद्धियां आठ प्रकार की होती है :

अणिमा, महिमा, लघिमा, गरिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, इशित्व और वशित्व।

◆ 9:00 बजने के स्थान पर नव द्रव्याणि लिखा हुआ है इसका तात्पर्य है कि 9 प्रकार की निधियां होती हैं :

पद्म, महापद्म, नील, शंख, मुकुंद, नंद, मकर, कच्छप, खर्व।

◆ 10:00 बजने के स्थान पर दशदिशः लिखा हुआ है, इसका तात्पर्य है कि दिशाएं 10 होती है :

पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान, नैऋत्य, वायव्य, आग्नेय, आकाश, पाताल।

◆ 11:00 बजने के स्थान पर रुद्रा: लिखा हुआ है, इसका तात्पर्य है कि रुद्र 11 प्रकार के हुए हैं :

कपाली, पिंगल, भीम, विरुपाक्ष, विलोहित, शास्ता, अजपाद, अहिर्बुध्न्य, शम्भु, चण्ड और भव।

सनातन धर्म में प्रत्येक वस्तु कुछ न कुछ अवश्य सिखाती है।

Wednesday, 8 March 2023

होली

होली का त्योहार मिलन का,
नफरत दूर भगाना है।
होली को हुड़दंग न समझो,
मानवता को बचाना है।।
मदिरा पीकर वाहन लेकर,
एम  के दूत बुलाना है।
बच्चों को वाहन कम दो,
जीवन अगर बचाना है।
नफरत दूर भगाकर के ही,
प्यार मोहब्बत लाना है।
वाणी संयम बना रहे यदि,
कटुता निकट न आयेगी।
दुर्व्यसनों से बचे रहे यदि, 
उम्र स्वयं बढ़ जाएगी।
मर्यादित शब्दों में रहना,
जीवन धन्य बनाता है।
सेवा भाव निभाने वाला,
स्वयं देव बन जाता है।
और की पीड़ा देख अगर ,
मन होता है याकुल व्याकुल।
हर संभव सेवा करने का,
रहता जो मानव व्याकुल।
वह मानवता का मानव सच्चा,
मनुज देव कहलाता है।
भारत मां का सच्चा सपूत,
हर धर्म से जिसका नाता है।
जो शब्दों से विष घोल रहा,
मर्यादा अपनी तोड़ रहा।
मादक पदार्थ सेवन करके,
अनुशासन घर के तोड़ रहा।
अपना परिवार विखंडन कर,
सबको पीड़ा पहुंचाता है।
उसका साथी बनने वाला,
 मानव दानव कहलाता है।
बारूद से ज्यादा विस्फोटक,
कट्टरता की वाणी है।
बारूद फटे बस एक जगह,
नफरत की वाणी भारी है।
अपने आचरण बदल करके
मानवता दिल में आ जाए।
सहयोग भावना जीवन की
जीवन धन्य बना जाए।

Thursday, 2 March 2023

अपनी समस्या

एक चूहा एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था।

एक दिन चूहे ने देखा कि उस कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है।

उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक चूहेदानी थी।

ख़तरा भाँपने पर उस ने पिछवाड़े में जा कर कबूतर को यह बात बताई कि घर में चूहेदानी आ गयी है।

कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है?

निराश चूहा ये बात मुर्गे को बताने गया।

मुर्गे ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा… जा भाई.. ये मेरी समस्या नहीं है।

हताश चूहे ने बाड़े में जा कर बकरे को ये बात बताई… और बकरा हँसते हँसते लोटपोट होने लगा।

उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई, जिस में एक ज़हरीला साँप फँस गया था।

अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर उस कसाई की पत्नी ने उसे निकाला और साँप ने उसे डस लिया।

तबीयत बिगड़ने पर उस व्यक्ति ने हकीम को बुलवाया। हकीम ने उसे कबूतर का सूप पिलाने की सलाह दी।

कबूतर अब पतीले में उबल रहा था।

खबर सुनकर उस कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन उसी मुर्गे को काटा गया।

कुछ दिनों बाद उस कसाई की पत्नी सही हो गयी, तो खुशी में उस व्यक्ति ने कुछ अपने शुभचिंतकों के लिए एक दावत रखी तो बकरे को काटा गया।

चूहा अब दूर जा चुका था, बहुत दूर ……….।

अगली बार कोई आपको अपनी समस्या बतायेे और आप को लगे कि ये मेरी समस्या नहीं है, तो रुकिए और दुबारा सोचिये।

समाज का एक अंग, एक तबका, एक नागरिक खतरे में है तो पूरा देश खतरे में है।

Sunday, 19 February 2023

एक रुपया

रेड लाइट पर रुकते ही गाड़ी के स्टीरियो की आवाज़ कम की
और
सिगरेट पीने के लिए शीशा नीचे किया ही था
कि आवाज़ आई...

बाबू जी एक रुपया दे दो!
खाना खाऊंगा!
बहुत भूख लगी है!

लगभग पंद्रह रुपये की सिगरेट हाथ में पकड़े हुए,
बहुत उम्दा और तलब के मूड में,
मैं उसे जलाने ही वाला था
कि इस आवाज़ से भंग हुई
अपनी नशेपूर्ती की तन्द्रा के टूटने से
कुछ चिड़चिड़ा सा गया अचानक
और एक बार को तो उसे झिड़क ही दिया!

चल बे,
आगे चल..!!!

फिर ध्यान आया
कि भूखा होगा बेचारा,
चलो कुछ दे ही देता हूँ!

इधर आ बे,
सुन तो.....

जी बाबू जी...

रुक,
ले लेता जा..!

गाड़ी में इधर उधर पड़े पैसे ढूंढने लगा मैं...
नोटों पर नज़र गई...
सबसे छोटा नोट बीस का दिखाई पड़ा...
सोचा कि इतने पैसे इस कंगाल के हाथ में देना...
नहीं, नहीं...
फिर मैंने सिक्कों में हाथ डाला...
अचानक दस रुपये का सिक्का हाथ लगा...
उसे भी छोड़ मैं एक रुपये का सिक्का ढूंढने लगा...
पर नहीं मिला..!!

दस के खुल्ले हैं क्या तेरे पास.??

जी बाबू जी,
हो जाएगा...!!

ला नौ रुपये वापिस कर जल्दी..!!

उसने नौ रुपये के सिक्के गिन कर मुझे थमा दिए!

इतने में ही सिग्नल ग्रीन हो गया!
मुझे अचानक ही कार आगे बड़ानी पड़ी!!
खैर जानता ही था कि पीछे दौड़ कर आएगा इसलिए गाड़ी धीरे से सिग्नल के पार लगाई और साइड में रोक ली! पर वो कहीं नहीं दिखा!

अचानक मेरी नज़र सड़क के दूसरी तरफ अनाथालय की चंदा मांगने वाली गाड़ी की तरफ पड़ी! वो बच्चा भी उसी तरफ लपकते देख हैरानी नहीं हुई मुझे! शायद वो अब उससे कुछ मांगने गया हो!

मैं वहीं खड़ा उसे देखने लगा और इंतज़ार करने लगा कि वो उस गाड़ी वाले से मांग कर इस तरफ वापिस आएगा तो उसे उसका दस रुपया दे दूंगा!

उस अनाथाश्रम की गाड़ी वाले ने उसे कोई कागज़ दिया और वो लड़का अपने खुले पैसे उसे दे कर आगे निकल गया!

मुझे हैरानी हुई और जिज्ञासा भी!
उसे दस रुपये भी देने ही थे, तो मैं ही सड़क पार कर दूसरी और चल दिया!

ओ लड़के,,,,
ओ लड़के,,,
सुन तो,,,
अबे ओ,,,,

नहीं सुना उसने!!
ट्रैफिक के शोर में आगे निकल गया!
इतने में मैं उस अनाथालय की गाड़ी तक पहुंच गया!

मैंने उस गाड़ी वाले से पूछा कि आपने उस मांगने वाले लड़के को कागज़ पर क्या लिख कर दिया?

वो रसीद थी साहब!

किस चीज़ की..??

जो पैसे उसने हमें दिए, उसकी!

किस बात के पैसे दिए उसने आपको!

कहता है कि कि मेरे बाप ने मेरे छोटे नए जन्में भाई को अनाथालय की चौखट पर छोड़ दिया था! ये पैसे उस तक पहुंचा देना और उससे कहना कि तेरा भाई इतना भी गरीब नहीं कि तुझे पाल न सके!

बहुत समझाते हैं साहब,
मानता ही नहीं!
उसे ये भी कह चुके कि उसका भाई हमारे अनाथालय में नहीं है!
जब भी हमारी गाड़ी देखता है, बस दौड़ा चला आता है और अपने सारे कमाए पैसे हमें दे जाता है!
कहता है कि ये पैसे उसके भाई तक न सही पर दूसरे अनाथों तक तो पहुंचते ही हैं, वो सब भी उसके भाई जैसे ही हैं!
वो उन्हें ही पाल लेगा और कोई बदले में भगवान को भेज कर उसके भाई को!
आज पूरे दिन के कमाए हुए एक सौ आठ रुपये जमा करवा गया!
लोगों के लिए इसे एक रुपया भी देना महंगा लगता होगा साहब और ये लड़का मदद के नाम पर हर बार अपनी पूरी दौलत लुटा जाता है!!
भगवान इसका भला करे.!!

उफ़्फ़फ़फ़फ़फ़फ़फ़....
हे भगवान...
बिना पिये हुई, उस सुलगती सिगरेट से अचानक ही हाथ जल उठा मेरा!

शायद ये जलन मेरे जीवन की सबसे ज़्यादा दहकने वाले शोलों से बनी थी..!!!