Wednesday, 8 March 2023

होली

होली का त्योहार मिलन का,
नफरत दूर भगाना है।
होली को हुड़दंग न समझो,
मानवता को बचाना है।।
मदिरा पीकर वाहन लेकर,
एम  के दूत बुलाना है।
बच्चों को वाहन कम दो,
जीवन अगर बचाना है।
नफरत दूर भगाकर के ही,
प्यार मोहब्बत लाना है।
वाणी संयम बना रहे यदि,
कटुता निकट न आयेगी।
दुर्व्यसनों से बचे रहे यदि, 
उम्र स्वयं बढ़ जाएगी।
मर्यादित शब्दों में रहना,
जीवन धन्य बनाता है।
सेवा भाव निभाने वाला,
स्वयं देव बन जाता है।
और की पीड़ा देख अगर ,
मन होता है याकुल व्याकुल।
हर संभव सेवा करने का,
रहता जो मानव व्याकुल।
वह मानवता का मानव सच्चा,
मनुज देव कहलाता है।
भारत मां का सच्चा सपूत,
हर धर्म से जिसका नाता है।
जो शब्दों से विष घोल रहा,
मर्यादा अपनी तोड़ रहा।
मादक पदार्थ सेवन करके,
अनुशासन घर के तोड़ रहा।
अपना परिवार विखंडन कर,
सबको पीड़ा पहुंचाता है।
उसका साथी बनने वाला,
 मानव दानव कहलाता है।
बारूद से ज्यादा विस्फोटक,
कट्टरता की वाणी है।
बारूद फटे बस एक जगह,
नफरत की वाणी भारी है।
अपने आचरण बदल करके
मानवता दिल में आ जाए।
सहयोग भावना जीवन की
जीवन धन्य बना जाए।

Thursday, 2 March 2023

अपनी समस्या

एक चूहा एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था।

एक दिन चूहे ने देखा कि उस कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है।

उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक चूहेदानी थी।

ख़तरा भाँपने पर उस ने पिछवाड़े में जा कर कबूतर को यह बात बताई कि घर में चूहेदानी आ गयी है।

कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है?

निराश चूहा ये बात मुर्गे को बताने गया।

मुर्गे ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा… जा भाई.. ये मेरी समस्या नहीं है।

हताश चूहे ने बाड़े में जा कर बकरे को ये बात बताई… और बकरा हँसते हँसते लोटपोट होने लगा।

उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई, जिस में एक ज़हरीला साँप फँस गया था।

अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर उस कसाई की पत्नी ने उसे निकाला और साँप ने उसे डस लिया।

तबीयत बिगड़ने पर उस व्यक्ति ने हकीम को बुलवाया। हकीम ने उसे कबूतर का सूप पिलाने की सलाह दी।

कबूतर अब पतीले में उबल रहा था।

खबर सुनकर उस कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन उसी मुर्गे को काटा गया।

कुछ दिनों बाद उस कसाई की पत्नी सही हो गयी, तो खुशी में उस व्यक्ति ने कुछ अपने शुभचिंतकों के लिए एक दावत रखी तो बकरे को काटा गया।

चूहा अब दूर जा चुका था, बहुत दूर ……….।

अगली बार कोई आपको अपनी समस्या बतायेे और आप को लगे कि ये मेरी समस्या नहीं है, तो रुकिए और दुबारा सोचिये।

समाज का एक अंग, एक तबका, एक नागरिक खतरे में है तो पूरा देश खतरे में है।