होली का त्योहार मिलन का,
नफरत दूर भगाना है।
होली को हुड़दंग न समझो,
मानवता को बचाना है।।
मदिरा पीकर वाहन लेकर,
एम के दूत बुलाना है।
बच्चों को वाहन कम दो,
जीवन अगर बचाना है।
नफरत दूर भगाकर के ही,
प्यार मोहब्बत लाना है।
वाणी संयम बना रहे यदि,
कटुता निकट न आयेगी।
दुर्व्यसनों से बचे रहे यदि,
उम्र स्वयं बढ़ जाएगी।
मर्यादित शब्दों में रहना,
जीवन धन्य बनाता है।
सेवा भाव निभाने वाला,
स्वयं देव बन जाता है।
और की पीड़ा देख अगर ,
मन होता है याकुल व्याकुल।
हर संभव सेवा करने का,
रहता जो मानव व्याकुल।
वह मानवता का मानव सच्चा,
मनुज देव कहलाता है।
भारत मां का सच्चा सपूत,
हर धर्म से जिसका नाता है।
जो शब्दों से विष घोल रहा,
मर्यादा अपनी तोड़ रहा।
मादक पदार्थ सेवन करके,
अनुशासन घर के तोड़ रहा।
अपना परिवार विखंडन कर,
सबको पीड़ा पहुंचाता है।
उसका साथी बनने वाला,
मानव दानव कहलाता है।
बारूद से ज्यादा विस्फोटक,
कट्टरता की वाणी है।
बारूद फटे बस एक जगह,
नफरत की वाणी भारी है।
अपने आचरण बदल करके
मानवता दिल में आ जाए।
सहयोग भावना जीवन की
जीवन धन्य बना जाए।