बड़ी कंपनी में बड़ी नौकरी के लिए साक्षात्कार था सैकड़ों लोगों में से सिर्फ दो अभ्यर्थी चुने गए। दोनों योग्यता में खरे उतरे। रिक्त स्थान एक और अच्छे अभ्यर्थी दो। क्या किया जाए। कंपनी प्रबंधक ने सोचा कि अंतिम चयन के पहले अभ्यर्थियों की और परीक्षा ली जाए। दोनों को मुंबई बुलाया गया। आलीशान होटल में अलग-अलग कमरे बुक किए गए। कंपनी प्रबंधक ने उनका साक्षात्कार लिया। उन्हें जांचा- परखा। प्रबंधक को दोनों अच्छे लगे। लेकिन चुनना तो एक को ही था। दोनों में किसे श्रेष्ठ
मानें ? प्रबंधक को एक उपाय सूझा। उसने उस पर अमल किया। अगले दिन प्रबंधक दोनों अभ्यर्थियों को हवाई अड्डे पर पहुंचाने के लिए गया। पहले अभ्यर्थी ने मिलते ही एक बंद पैकेट प्रबंधक को देते हुए कहा, “सर ! शायद कल आप यह पैकेट मेरे कमरे में भूल गए थे। इस पर प्रबंधक ने पूछा, क्या है इसमें ? पहले अभ्यर्थी ने कहा, सर ! यह पैकेट मेरा नहीं है, फिर मुझे कैसे मालूम होगा कि इसमें क्या है ? यह अगर आपका नहीं है तो होटल वालों को दे दें। शायद इसका अधिकारी उनके पास आएगा। कंपनी प्रबंधक ने ‘हां’ में सिर हिलाया। इतने में दूसरा अभ्यार्थी भी आया। प्रबंधक ने दोनों को अपनी कार में बिठाकर हवाईअड्डे पर छोड़ा। दोनों अभ्यर्थी प्रबंधक महोदय से हाथ मिलाकर जाने लगे, तब कंपनी प्रबंधक ने दूसरे अभ्यर्थी को बुलाकर कहा, “देखिए, कल मैं आपके कमरे में 10 हजार रुपए एक पैकेट में रख आया था। कृपया उसे वापस लौटाएं। कंपनी प्रबंधक के मुंह से जैसे ही यह बात निकली दूसरे अभ्यर्थी का चेहरा फक पड़ गया। उसने पैकेट लौटा दिया।पहला अभ्यर्थी इस घटना से काफी घबराया था। तभी कंपनी प्रबंधक ने पहले अभ्यर्थी के हाथ में नियुक्ति पत्र और बीस हजार रुपए रखकर कहा, “आप ईमानदार हैं। इस नौकरी के आप ही सच्चे अधिकारी हैं। और यह छोटी सी रकम है आपकी ईमानदारी के लिए, मेरी ओर से एक छोटा सा तोहफा।”
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क्या यह बात सच नहीं है कि बेईमान भी चाहता है कि उसके साथी ईमानदार रहें। कारण स्पष्ट है, ईमानदारी के बिना संसार उलझ जाएगा। इसलिए ईमानदारी को अपनाएं और अपने लक्ष्य की ओर बिना किसी भय के बेहिचक बढ़ते जाएं। आपको कोई नहीं रोक पाएगा।
Friday, 18 December 2015
ईमानदारी
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