Sunday, 21 January 2018

नालायक

देर रात अचानक ही उनकी तबियत बिगड़
गयी। आहट पाते ही नालायक उनके सामने था । ड्राइवर बुलाने
की बात हुयी, पर इतनी जल्दी ड्राइवर कहाँ आ पायेगा, कहते हुये उसने सहज जिद और अपने मजबूत कंधो के सहारे उन्हे कार में बिठाया और तेज़ी से हॉस्पिटल की ओर भागा । "धीरे चला नालायक, एक काम जो इससे ठीक से हो जाए ।" वृद्ध उसपर चीखें । "आप ज्यादा बातें ना करें बाउजी, बस तेज़ साँसें लेते रहिये, हम हॉस्पिटल पहुँचने वाले हैं।" अस्पताल पहुँचकर उन्हे डाक्टरों की निगरानी में सौंप,वो
बाहर चहलकदमी करने लगा , बचपन
से आज तक अपने लिये वो नालायक
ही सुनते आया था। नालायक फिर से
फेल हो गया । नालायक को अपने यहाँ कोई
चपरासी भी ना रखे । कोई
बेवकूफ ही इस नालायक को
अपनी बेटी देगा ।
बेचारी के भाग्य फूटें थे जो इस
नालायक के पल्ले पड़ गयी ।
बाउजी की सुन दोनों भाई
और बाकी सदस्य भी उसे
नालायक ही बुलाते हैं । बस एक माँ
ही हैं जिसने उसके असल नाम को
अबतक जीवित रखा है , पर आज
अगर उसके बाउजी को कुछ हो गया तो
शायद वे भी.. इस ख़याल के आते
ही उसकी आँखे छलक
गयी और वो उनके लिये प्रार्थना में
डूब गई प्रार्थना में शक्ति थी या
समस्या मामूली, डाक्टरों ने वृद्ध को
घर जाने की अनुमति दे दी
। घर लौटकर उनके कमरे में छोड़ते हुये वृद्ध
एक बार फिर चीखें, " छोड़ नालायक !
तुझे तो लगा होगा कि बूढ़ा अब लौटेगा ही
नहीं ।" उदास वो उस कमरे से निकला,
तो वृद्धा से रहा नहीं गया , " इतना सब
तो करता है, बावजूद इसके आपके लिये वो नालायक
ही है ?" इसबार वृद्ध ने आश्चर्य
भरी नजरों से उनकी ओर
देखा और फिर नज़रें नीची
करते हुये बोले, " आप भी शायद मेरे
शब्दों से ही धोखा खा
गयीं ? अरे , क्या कमी है
आपके इस बेटे में । अपना परिवार, हम दोनों को,
घर-मकान , पुश्तैनी कारोबार , रिश्तेदार
और रिश्तेदारी सब कुछ तो
बखूबी सम्भाल रहा है , जबकि
आपके दोनों लायक बेटे सिर्फ अपने
बीबी और बच्चों को ।
इतना सब के बाद भी मैं इसे बेटा कह
के नहीं बुला पाता हूँ , गले से
नहीं लगा पाता हूँ तो दुख मुझे
भी होता है, पर उससे भी
अधिक डर लगता है कि कहीं ये
भी लायक ना बन जाये । आप चाहें तो
इसे मेरा स्वार्थ ही कह लें ।" कहते
हुये उन्होंने अपने हाथ जोड़ दिये जिसे वृद्धा ने
झट से अपनी हथेलियों में भर लिया ।
दूसरी ओर दरवाज़े पर खड़ा वो
आंसुओं में तरबतर हो गया था । उसे लगा कि दौड़
कर अपने बाउजी के गले से लग जाये
पर ऐसा करते ही उसके
बाउजी झेंप नहीं जाते, वो
अपने कमरे की ओर बढ़ गया ।

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